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(Chorus)
​ज़रा सी गुफ़्तगू कर ले,
ज़रा सा हमसफ़र बन जा।
हज़ारों मोड़ हैं राहों में,
तू मेरा रहगुज़र बन जा।
​ज़रा सी धूप दे दे बस,
फिर चाहे छाँव छीन ले,
ज़रा सा साथ दे, बस फिर,
चाहे अजनबी बन जा...
ज़रा सी गुफ़्तगू कर ले।
​ (Verse 1)
​तेरी बंदगी में खो के ये समझ आया,
मैंने खुद को पा लिया, जबसे तुझे पाया।
हाँ, तेरी बंदगी में खो के ये समझ आया,
मैंने खुद को पा लिया, जबसे तुझे पाया।
​जो तू रूठ जाए तो ये लगने लगता है,
धूप है सर पर मगर, रूह में है साया।
जाना है जा, पर छोड़ जा, अपनी वो सुबह,
इस रात को है तेरी ही परवाह...
​ज़रा सी गुफ़्तगू कर ले,
ज़रा सा हमसफ़र बन जा।
(Verse 2)
​जब तलक तेरी नज़र का आसरा रहा,
सूखे हुए शज़र पे भी इक गुल खिला रहा।
अब जो तू जुदा है तो ये वहम सा है,
क्या मेरा ख़ुदा भी मुझसे ख़फ़ा रहा?
​सुन ले सदा, ओ बेवफ़ा, या दे-दे सज़ा,
जीना नहीं है अब तेरे बिना...
(Outro)
​ज़रा सी गुफ़्तगू कर ले,
ज़रा सा हमसफ़र बन जा।
ज़रा सी धूप दे दे बस,
फिर चाहे छाँव छीन ले,
ज़रा सा साथ दे, बस फिर,
चाहे अजनबी बन जा...
ज़रा सी गुफ़्तगू कर ले।