Pukhraj Singh
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4 месяца назад
(स्थाई - मुख्य भाग)गोरी नाचे आंगणिये में, बाजे ढोल-नगाड़ा सा,म्हारा रंगीला बन्ना सा, थे तो धीमे-धीमे आवो सा।चूड़लो चमके हाथ में, म्हारो लहरियो लहरावे सा,गोरी थारी बातां सुनके, बन्ना मंद-मंद मुस्कावे सा।(अंतरा 1 - बन्नी की फरमाइश)जयपुर से मँगा दो बन्ना, बारीक गोटा की साड़ी,जोधपुर की जूतियाँ मँगा दो, लागे मनने प्यारी।नाक की नथनी चमके बन्ना, सुरमो आँख सुहावे सा,म्हारा रंगीला बन्ना सा, थे तो धीमे-धीमे
4 месяца назад
(स्थाई - मुख्य भाग)गोरी नाचे आंगणिये में, बाजे ढोल-नगाड़ा सा,म्हारा रंगीला बन्ना सा, थे तो धीमे-धीमे आवो सा।चूड़लो चमके हाथ में, म्हारो लहरियो लहरावे सा,गोरी थारी बातां सुनके, बन्ना मंद-मंद मुस्कावे सा।(अंतरा 1 - बन्नी की फरमाइश)जयपुर से मँगा दो बन्ना, बारीक गोटा की साड़ी,जोधपुर की जूतियाँ मँगा दो, लागे मनने प्यारी।नाक की नथनी चमके बन्ना, सुरमो आँख सुहावे सा,म्हारा रंगीला बन्ना सा, थे तो धीमे-धीमे