Lyrics
[इंट्रो]
ये शहर सपनों का, कहते सब जुबां से
पर सपने टूटते रोज़, झुग्गियों की छतों से
चमकती लाइटें दूर, अंधेरा पास में
ये मुंबई की कहानी, सुन मेरी आवाज़ में
[वर्स 1]
टीन की छत, नीचे पानी टपकता
एक कमरे में पाँच लोग, साँस भी है भटकता
बच्चे हाथ में किताब, पेट में भूख
स्कूल दूर सपना, हकीकत में धूप
माँ सुबह उठे चार बजे काम पे जाने
पिता की मज़दूरी आज मिले या ना मिले ठिकाने
शहर भागता आगे, ये पीछे रह जाते
कचरे के ढेर में भी उम्मीद ढूंढ लाते
फुटपाथ बना घर, सड़क बनी आंगन
हर दिन जंग है, फिर भी ना टूटा है मन
लोग कहते “मेहनत कर”, पर रास्ते ही बंद
जब पैदा होते ही सिस्टम कह दे “तू कम
[हुक / कोरस]
ये गरीबी नहीं पसंद, पर गरीबी में जीते
सपनों की कीमत यहाँ, हालात ही लिखे
मुंबई बोलती ऊँचा, पर सुनती नहीं दर्द
झुग्गियों में पलती है, अनसुनी हर एक सर्द
[वर्स 2]
बारिश आई तो डर, घर बहे ना साथ में
नाली का पानी घुसा, उम्मीद भी हाथ में
बीमारी आई तो दवा भी सवाल
सरकारी अस्पताल में लाइन बेहाल
बच्चे सीखें जल्दी, ज़िंदगी का पाठ
खिलौने नहीं मिले, मिले हालात
एक तरफ शीशे के टावर, दूसरी तरफ धुआँ
बीच में फँसा इंसान, पूछे “मेरी क्या ग़लती यहाँ?”
टीवी पे शहर चमके, रील्स में खुशहाल
पर कैमरे से बाहर है असली सवाल
मेहनत का पसीना सस्ता यहाँ बिकता
गरीब का पसीना भी अमीर को ही दिखता
[हुक / कोरस]
ये गरीबी नहीं पसंद, पर गरीबी में जीते
सपनों की कीमत यहाँ, हालात ही लिखे
मुंबई बोलती ऊँचा, पर सुनती नहीं दर्द
झुग्गियों में पलती है, अनसुनी हर एक सर्द
[ब्रिज]
कभी मत पूछ “क्यों नहीं बढ़ता?”
जब सीढ़ी ही टूटी हो, तो कैसे चढ़ता?
कभी मत बोल “किस्मत खराब है”
किस्मत भी वही लिखता, जिसके हाथ में कलम आज़ाद है
[वर्स 3]
पर फिर भी आँखों में आग बाकी है
हर झुग्गी में एक छुपा हुआ कलाकार बाकी है
कोई रैप लिखे रात को मोबाइल की लाइट में
कोई डॉक्टर बने, सपनों की फाइट में
ये शहर हमारा भी है, हम भी हैं इसकी जान
सिर्फ़ मज़दूर नहीं, हम भी हैं पहचान
अगर मौका मिले, तो तस्वीर बदले
झुग्गी की आवाज़ भी इतिहास लिखे
[आउट्रो / हुक स्लो]
ये गरीबी हमारी पहचान नहीं
ये मजबूरी है बस, कोई कहानी नहीं
मुंबई अगर सुन ले, तो बदले ये सीन
झुग्गी से भी निकलेगा एक दिन नया किंग
ये शहर सपनों का, कहते सब जुबां से
पर सपने टूटते रोज़, झुग्गियों की छतों से
चमकती लाइटें दूर, अंधेरा पास में
ये मुंबई की कहानी, सुन मेरी आवाज़ में
[वर्स 1]
टीन की छत, नीचे पानी टपकता
एक कमरे में पाँच लोग, साँस भी है भटकता
बच्चे हाथ में किताब, पेट में भूख
स्कूल दूर सपना, हकीकत में धूप
माँ सुबह उठे चार बजे काम पे जाने
पिता की मज़दूरी आज मिले या ना मिले ठिकाने
शहर भागता आगे, ये पीछे रह जाते
कचरे के ढेर में भी उम्मीद ढूंढ लाते
फुटपाथ बना घर, सड़क बनी आंगन
हर दिन जंग है, फिर भी ना टूटा है मन
लोग कहते “मेहनत कर”, पर रास्ते ही बंद
जब पैदा होते ही सिस्टम कह दे “तू कम
[हुक / कोरस]
ये गरीबी नहीं पसंद, पर गरीबी में जीते
सपनों की कीमत यहाँ, हालात ही लिखे
मुंबई बोलती ऊँचा, पर सुनती नहीं दर्द
झुग्गियों में पलती है, अनसुनी हर एक सर्द
[वर्स 2]
बारिश आई तो डर, घर बहे ना साथ में
नाली का पानी घुसा, उम्मीद भी हाथ में
बीमारी आई तो दवा भी सवाल
सरकारी अस्पताल में लाइन बेहाल
बच्चे सीखें जल्दी, ज़िंदगी का पाठ
खिलौने नहीं मिले, मिले हालात
एक तरफ शीशे के टावर, दूसरी तरफ धुआँ
बीच में फँसा इंसान, पूछे “मेरी क्या ग़लती यहाँ?”
टीवी पे शहर चमके, रील्स में खुशहाल
पर कैमरे से बाहर है असली सवाल
मेहनत का पसीना सस्ता यहाँ बिकता
गरीब का पसीना भी अमीर को ही दिखता
[हुक / कोरस]
ये गरीबी नहीं पसंद, पर गरीबी में जीते
सपनों की कीमत यहाँ, हालात ही लिखे
मुंबई बोलती ऊँचा, पर सुनती नहीं दर्द
झुग्गियों में पलती है, अनसुनी हर एक सर्द
[ब्रिज]
कभी मत पूछ “क्यों नहीं बढ़ता?”
जब सीढ़ी ही टूटी हो, तो कैसे चढ़ता?
कभी मत बोल “किस्मत खराब है”
किस्मत भी वही लिखता, जिसके हाथ में कलम आज़ाद है
[वर्स 3]
पर फिर भी आँखों में आग बाकी है
हर झुग्गी में एक छुपा हुआ कलाकार बाकी है
कोई रैप लिखे रात को मोबाइल की लाइट में
कोई डॉक्टर बने, सपनों की फाइट में
ये शहर हमारा भी है, हम भी हैं इसकी जान
सिर्फ़ मज़दूर नहीं, हम भी हैं पहचान
अगर मौका मिले, तो तस्वीर बदले
झुग्गी की आवाज़ भी इतिहास लिखे
[आउट्रो / हुक स्लो]
ये गरीबी हमारी पहचान नहीं
ये मजबूरी है बस, कोई कहानी नहीं
मुंबई अगर सुन ले, तो बदले ये सीन
झुग्गी से भी निकलेगा एक दिन नया किंग